सालों से चल रही अवैध महुआ शराब फैक्ट्री पर कार्रवाई, आबकारी विभाग और स्थानीय थाना की भूमिका पर सवाल

यह लापरवाही है या फिर किसी तरह का संरक्षण? महिलाओं और बच्चों पर सीधा असर

शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़ 

सालों से चल रही अवैध महुआ शराब फैक्ट्री पर कार्रवाई, आबकारी विभाग और स्थानीय थाना की भूमिका पर सवा

कोरिया जिले के चरचा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम फूलपुर में महुआ शराब की अवैध फैक्ट्री पर आबकारी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई के बाद अब कई गंभीर और चौंकाने वाले सवाल खड़े हो गए हैं। जिस अवैध कारोबार का भंडाफोड़ आज हुआ है, वह किसी दिन या महीने नहीं, बल्कि सालों से खुलेआम संचालित हो रहा था।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिले का आबकारी विभाग और स्थानीय थाना इतने वर्षों तक इस अवैध धंधे से कैसे अनजान रहे?
ग्राम फूलपुर के जिस स्थान पर अवैध डिस्टिलरी संचालित हो रही थी, वह न तो कोई दुर्गम इलाका है और न ही पूरी तरह सुनसान। जंगल के बीच स्थित इस मकान से प्रतिदिन सैकड़ों लीटर महुआ शराब का निर्माण कर आसपास के क्षेत्रों में खुलेआम सप्लाई की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार, बाइक और अन्य साधनों से शराब की ढुलाई दिन-दहाड़े होती थी। इसके बावजूद न आबकारी विभाग ने और न ही स्थानीय पुलिस ने कभी ठोस कार्रवाई की।
यह अवैध धंधा कोई नया नहीं था। लंबे समय से इस क्षेत्र में महुआ शराब का जाल फैला हुआ है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में शराब का उत्पादन और वितरण हो रहा था, तो यह सवाल लाज़मी है कि क्या संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह अवैध फैक्ट्री चरचा थाना क्षेत्र से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर संचालित हो रही थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार अनदेखी की गई।
अब सवाल उठता है—
यह लापरवाही है या फिर किसी तरह का संरक्षण?
महिलाओं और बच्चों पर सीधा असर
ग्रामीण महिलाओं ने खुलकर बताया कि अवैध शराब के कारण परिवार बिखर रहे हैं, घरेलू हिंसा बढ़ रही है और बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि जब तक अवैध शराब पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी, तब तक समाज में सुधार संभव नहीं है।
कार्रवाई के बाद महिलाओं ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया।
फिलहाल, आम जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इस मामले में केवल शराब माफिया ही कटघरे में खड़े होंगे या फिर वर्षों से आंख मूंदे बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी।

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